2033 तक निर्मित नए डेटा सेंटर उतनी ही बिजली की खपत कर सकते हैं जितनी भारत आज उपयोग करता है।
आपूर्ति, ऊर्जा और डेटा-सेंटर क्षमता की गणना यह तय करती है कि AI कितने सस्ते में चल सकता है। बुनियादी ढांचे में बदलाव हफ्तों बाद अनुमान लागत में दिखाई देता है।
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